प्लूटो (Pluto) को मौत का देवता माना गया है
प्लूटो आपकी कुंडली में जहाँ भी स्थित है, वह उस विशेष क्षेत्र (जैसे शिक्षा, करियर, माता, पत्नी या काम) को सीधे प्रभावित करता है। यदि यह अच्छी स्थिति में नहीं है, तो यह उस क्षेत्र से संबंधित समस्याओं का कारण बन सकता है।
शनि जैसा दाता: यदि प्लूटो सकारात्मक स्थिति में है, तो यह शनि देव की तरह एक 'दाता' की भूमिका निभाता है और आपको जीवन दान या सफलता प्रदान करता है।
अदृश्य सफलता: प्लूटो का प्रभाव अक्सर बहुत ही रहस्यमयी होता है। आपको पता भी नहीं चलता कि कब आपकी पढ़ाई पूरी हो गई, कब आपकी शादी हो गई या आप कब सफल/अमीर बन गए। यह सब प्लूटो और शनि के अदृश्य तालमेल का परिणाम माना गया है।
भय और बाधाएं: आपके जीवन में आने वाले शत्रु या वे परिस्थितियाँ जिनसे आप घबराते हैं, वे प्लूटो के प्रभाव का संकेत हो सकती हैं।
कुंडली के कुछ भावों में प्लूटो के फल
प्रथम भाव (लग्न): यहाँ प्लूटो जातक के आत्मविश्वास को प्रभावित करता है, जिससे मानसिक पीड़ा हो सकती है।
द्वितीय भाव: यह स्थान धन, वाणी और कुटुंब से संबंधित है, जहाँ प्लूटो इन क्षेत्रों में बाधाएँ या समस्याएं उत्पन्न कर सकता है।
छठा भाव: यहाँ प्लूटो का प्रभाव शत्रुता और संघर्ष से जुड़ा है, जहाँ इसे सकारात्मक रूप से संभालने पर यह ऊर्जा को स्तंभन (block) कर सकता है।
सप्तम भाव: यह भाव पार्टनरशिप और विवाह का है। यहाँ प्लूटो की स्थिति में अहंकार त्यागना और स्वीकृति (Acceptance) अपनाना आवश्यक है, अन्यथा संबंधों में दरार आ सकती है।
अष्टम भाव: चूंकि प्लूटो स्वयं मृत्यु और रहस्य का कारक है, इसलिए यह भाव (जो अष्टम ही है) में यह अकस्मात दुर्घटनाओं, विनाश और गहन परिवर्तनों का संकेत देता है।
नवम भाव: यह भाव धर्म और उच्च शिक्षा का है, जहाँ प्लूटो एक नई विचारधारा या धर्म का निर्माण कर सकता है।
दशम भाव: यहाँ यह आपके करियर और कामकाज को प्रभावित करता है। अपनी पदोन्नति या सफलता पर घमंड करने से यह आपके करियर में बड़े बदलाव या बाधाएं ला सकता है।
प्लूटो के उपाय
हनुमान जी की कृपा: यदि कुंडली में प्लूटो परेशान कर रहा है, तो हनुमान जी की शरण में जाना सबसे उत्तम है। यह नाभि क्षेत्र को ऊर्जावान (गर्म) रखने में मदद करता है।
मंगल के उपाय: प्लूटो से जुड़ी समस्याओं के लिए मंगल के दान करना, मीठी चीज़ों का दान करना और लाल रंग का उपयोग करना लाभदायक होता है।
चरण स्पर्श: बड़ों, गुरुओं, परिवार के सदस्यों और यहाँ तक कि बच्चों के भी चरण स्पर्श करने या उन्हें सम्मान देने से प्लूटो के प्रभाव को संतुलित किया जा सकता है।
साक्षी भाव (Observer): प्लूटो के प्रभाव को समझने और उसे काबू करने के लिए 'साक्षी भाव' विकसित करना ज़रूरी है। जीवन की घटनाओं को बिना विचलित हुए एक ऑब्जर्वर की तरह देखें।
अतीत को छोड़ना: पास्ट की गलतियों से जुड़ी 'कॉर्ड कटिंग' (Cord Cutting) तकनीक अपनाएं। जो बातें या रिश्ते कष्ट दे रहे हैं, उनसे मानसिक रूप से खुद को अलग करना और उन यादों को समाप्त करना ही मुक्ति का मार्ग है।
रोचक प्रश्न-उत्तर (Interesting Q&A)
हनुमान जी की पूजा कैसे करें?
- दीप प्रज्वलन: पूजा की शुरुआत हनुमान जी की मूर्ति के सामने शुद्ध घी या चमेली के तेल का दीपक जलाकर करें।
- अर्पण: हनुमान जी को सिंदूर, लाल फूल, अक्षत और चमेली का तेल अर्पित करें।
- भोग: उन्हें गुड़-चने, बेसन के लड्डू या फल का भोग लगाएं।
- पाठ और मंत्र: हनुमान चालीसा, सुंदरकांड या 'ओम हनुमते नमः' मंत्र का जाप करना अत्यंत लाभकारी माना जाता है।
- आरती: अंत में कपूर या घी के दीपक से हनुमान जी की आरती करें और उनसे अपनी गलतियों के लिए क्षमा मांगें।
क्या प्लूटो युद्ध के लिए जिम्मेदार है?
प्लूटो स्वयं अकेले युद्ध के लिए जिम्मेदार नहीं है, बल्कि यह नेप्च्यून जैसे अन्य ग्रहों के साथ मिलकर प्रभाव डालता है। नेप्च्यून तूफानों का देवता है और जब नेप्च्यून 12वीं राशि में होता है, तब युद्ध की स्थितियाँ बनती हैं। प्लूटो का कार्य इन स्थितियों में विखंडन या टुकड़ों में तोड़ना है, जो युद्ध जैसी विनाशकारी घटनाओं को गति देता है।


