जीत और हार के भाव
KP पद्धति में किसी भी घटना को "भावों के संयोग" से देखा जाता है। क्रिकेट में प्रश्न सीधा होता है: लग्न वाली टीम जीतेगी या सातवें भाव वाली? इसके लिए ज्योतिषी कुछ विशेष भावों के समूह देखते हैं।
लग्न वाली टीम के लिए शुभ भाव
- पहला भाव (1): स्वयं टीम, उसका आत्मविश्वास और शुरुआत।
- तीसरा भाव (3): साहस, पराक्रम और प्रयास।
- छठा भाव (6): प्रतिद्वंद्वी पर विजय, प्रतियोगिता में आगे निकलना।
- दसवाँ भाव (10): कर्म, प्रदर्शन और सफलता।
- ग्यारहवाँ भाव (11): लाभ, इच्छा-पूर्ति और जीत।
सातवें भाव वाली टीम के लिए शुभ भाव
सातवें भाव से वही गिनती करने पर ये भाव बनते हैं:
- सातवाँ भाव (7): विरोधी टीम स्वयं।
- नौवाँ भाव (9): सातवें से तीसरा, यानी विरोधी का पराक्रम।
- बारहवाँ भाव (12): सातवें से छठा, यानी विरोधी की विजय।
- चौथा भाव (4): सातवें से दसवाँ, यानी विरोधी का प्रदर्शन।
- पाँचवाँ भाव (5): सातवें से ग्यारहवाँ, यानी विरोधी का लाभ।
निर्णय कैसे लिया जाता है?
कस्प का सब-लॉर्ड: KP में किसी भाव के परिणाम का अंतिम निर्णायक उस भाव के कस्प का सब-लॉर्ड माना जाता है। क्रिकेट में अधिकतर ज्योतिषी लग्न, छठे और ग्यारहवें कस्प के सब-लॉर्ड को विशेष रूप से देखते हैं।
कौन-से भाव सक्रिय हैं: यदि ये सब-लॉर्ड अपने नक्षत्र स्वामी के माध्यम से 1, 6, 10, 11 जैसे भावों को अधिक दर्शाते हैं, तो संकेत लग्न वाली टीम की ओर माना जाता है। यदि वे 5, 7, 12, 4 जैसे भावों को अधिक दर्शाते हैं, तो संकेत दूसरी टीम की ओर माना जाता है।
पुष्टि: इसके बाद रूलिंग प्लैनेट्स और चल रही दशा-अंतर्दशा से संकेत की पुष्टि की जाती है।
सीखने वालों के लिए सलाह
अक्सर दोनों टीमों के भाव एक साथ सक्रिय दिखते हैं, क्योंकि एक ही ग्रह कई भावों का कारक होता है। ऐसे में "किसका वज़न अधिक है" यह समझना ही असली कौशल है, और यह कौशल अभ्यास और मार्गदर्शन से ही आता है।


